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माता पिता के प्यार का साया जिन्हे मिला नही है, जो अनाथ है, गुंगे बहिरे है, निराधार तथा निराश्रित है, ऐसे बच्चों कि पढाई, भोजन तथा निवास कि मुफ्त मे सुविधा हमारी संस्था १९८७ से कर राही है|
इन सब बच्चों कि उमर १८ होणे के बाद इनके सामने जो सबसे बडा सवाल तैयार होता है, वो है कि अब आगे क्या करें?
उनके पास उपजीविका का कोई भी साधन नही रहता| जबकी वो किसी कंपनी मी जॉब के लिये आवेदन भी करते है, मगर उनका इतिहास देखकर जॉब मिलने को परेशानी जरूर होती है|
 
इस बच्चों कि शिक्षा और देश कि जरुरत देखकर, हमारी संस्था ने इन बच्चों के लिये उपजीविका का साधन तैयार करने हेतू ये उपक्रम शुरू किया है, जिसमे बकरीपालन, मुर्गी पालन, गायपालन, बदकपालन, हायड्रोपोनिक (कम पाणी में चारा बनाने का तंत्रज्ञान) आदी का समावेश है|